31.3.16

चमत्कारी सूर्य तेल

सूर्य दोष और कई रोगों में अमृत है चमत्कारी सूर्य तेल, घर पर बनाएं
श्री रामानुज
सूर्य यानी सृष्टि का निर्माता, यदि सूर्य न हो तो इस धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। विश्व की कई प्राचीन सभ्यताओं और पौराणिक ग्रंथों में सूर्य को साक्षात देवता माना गया है। सूर्य का
ज्योतिष में सर्वोच्च स्थान है। जिन भी जातकों की कुंडली में सूर्यकृत पीड़ा या रोगों से पीड़ा हैं उनके लिए एक अचूक उपाय है जो निश्चित ही न केवल सूर्य दोष शांत करता है बल्कि सामान्य जातक भी यही इस चमत्कारी सूर्य तेल का उपयोग करें तो उनका भी कल्याण होता है।
ह्रदय रोग में तो यह रामबाण औषधि की तरह है। आयुर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है।

सूर्य तेल बनाने की विधि

आयुर्वेद्शास्त्र में वर्णित है कि सूर्य तेल बनाने के लिए 200 ग्राम सूरजमुखी व 200 ग्राम तिल का तेल लें। अब इसमें 4 ग्राम लौंग व 8 ग्राम केशर मिलाएं।
अब लाल रंग की कांच की बोतल में रखें।
यदि कांच की लाल बोतल उपलब्ध न हो तब , सफेद रंग की बोतल में इस मिश्रिण को रखें और बोतल के सिरे को लाल कपड़े या लाल रंग के कागज से ढंक दें।
इसे लगभग 15 दिनों तक सूर्य के प्रकाश में रखें। इस तरह सूर्य तेल बनकर तैयार हो जाएगा।
इन रोगों में है रामबाण :
यदि आप उच्च रक्तचाप या ह्रदय रोग से पीड़ित हैं। तब पूरे शरीर पर सूर्य तेल की मालिश करने से लाभ मिलता है। छोटे बच्चों की मालिश सूर्य तेल से करने पर उन्हें विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।
सूर्य तेल का नियमित उपयोग भी कर सकते हैं, इससे चेहरे पर निखार और कान्ति बढ़ती है। जिससे आप सुंदर दिखने के चाह को पूरा कर सकते हैं।
कब करें उपयोग : जानिए
सूर्य तेल बन जाने के बाद इसका उपयोग रविवार से शुरू करें। प्रत्येक रविवार को इस सूर्य तेल के द्वारा शरीर पर मालिश करने से किसी भी तरह का सूर्यकृत रोग से मुक्ति मिलती है। यदि इसे रोज उपयोग में नहीं ला सकते हैं, तो सप्ताह में एक बार यानी रविवार को इस सूर्य तेल का उपयोग जरूर करें।
आप सूर्य तेल का उपयोग महीने में एक बार सिर्फ रविवार के दिन भी कर सकते हैं। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन माना जाता है इसलिए इस तेल की महत्ता और बढ़ जाती है।

12.2.16

धन पाने का यह है सबसे पुराना ऋग्वेद मंत्

धन पाने का यह है सबसे पुराना ऋग्वेद मंत्र
जीवन में हम सभी धन चाहते हैं। यह कामना सदियों पहले भी इंसान में थी। आइए जानते हैं धन प्राप्ति का सबसे पुराना मंत्र कौन सा है, और यह किस वेद में लिखा है...
`ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर।
भूरिरेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्।
आ नो भजस्व राधसि।।´
ऋग्वेद (4/32/20-21)
भावार्थ : हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं।
आप्तजनों से सुना है कि संसार भर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है, उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं - उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान, मुझे अर्थ संकट से मुक्त कर दो।
इस मंत्र का प्रात:काल प्रतिदिन दीपक जलाकर जाप करने से आर्थिक संकटों से राहत मिलती है।

पैसा नहीं ठहर रहा है तो वास्तु के अनुसार आपके घर में यह 9 दोष हो सकते है

अगर पैसा नहीं ठहर रहा है तो वास्तु के अनुसार आपके घर में यह 9 दोष हो सकते है

आप भले ही हजारों में कमाएं लेक‌िन बचत कर सकें तो आपके अमीर बनते देर नहीं लगती है लेक‌िन लाखों में कमाएं और बचत नहीं कर पाएं तो आप कभी अमीर नहीं हो सकते. इसल‌िए कमाई में बरकत बहुत जरुरी है यानी आपके पास पैसा ठहरना चाह‌िए. अगर पैसा नहीं ठहर रहा है तो वास्तु के अनुसार आपके घर में यह 9 दोष हो सकते हैं. ज‌िन्हें आपको दूर करना चाह‌िए.

1. घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में डस्टबीन या कचड़ा नहीं रखें. यहां गंदगी होने से धन का नाश होता रहता है.

2. नल से पानी का टपकते रहना वास्तुशास्त्र में आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण माना गया है, जिसे बहुत से लोग अनदेखा कर जाते हैं. वास्तु के नियम के अनुसार नल से पानी का टपकते रहना धीरे-धीरे धन के खर्च होने का संकेत होता है. इससे बरकत नहीं होती.

3. पश्च‌िम द‌िशा में रसोई घर होने पर धन का आगमन अच्छा रहता है लेक‌िन बरकत नहीं रहती है यानी धन जैसे आता है वैसे खर्च भी हो जाता है.

4. घर की ढ़लान अगर उत्तर पूर्व में ऊंची है तो धन के आगमन में रुकावट आती रहती है और आय की अपेक्षा खर्च ज्यादा होता है.

5. शयनकक्ष में कमरे के प्रवेश द्वार के सामने वाली दीवार के बाएं कोने पर धातु की कोई चीज लटकाकर रखें. वास्तुशास्त्र के अनुसार यह स्थान भाग्य और संपत्ति का क्षेत्र होता है. इस दिशा में दीवार में दरारें हों तो उसकी मरम्मत करवा दें. इस दिशा का कटा होना भी आर्थिक नुकसान का कारण होता है.

6. मकान का ढाल उत्तर पश्च‌िम में नीचा हो तब भी घर में बरकत नहीं होती है. यानी घर के उत्तर पूर्व में ढ़लान होना चाह‌िए. और पानी इसी ओर से न‌िकास होना चाह‌िए. उत्तर पश्च‌िम का भाग ऊंचा होना चाह‌िए. 

7. धन में वृद्धि और बचत के लिए तिजोड़ी अथवा आलमारी जिसमें धन रखते हों उसे दक्षिण की दिवार से सटा कर इस प्रकार रखें कि, इसका मुंह उत्तर दिशा की ओर रहे. पूर्व की दिशा की ओर आलमारी का मुंह होने पर भी धन में वृद्धि होती है लेकिन उत्तर दिशा उत्तम मानी गयी है. दक्ष‌िण द‌‌िशा की ओर तिजोड़ी का मुंह होने पर धन नहीं ठहरता है.

8. घर के दक्ष‌िण पश्च‌िम द‌िशा में शौचालय या पानी की टंकी होने पर धन नहीं ठहरता है.

9. टूटा हुआ बेड और पलंग घर में नहीं रखना चाहिए इससे आर्थिक लाभ में कमी आती है और खर्च बढ़ता है. घर की छत पर या सीढ़ी के नीचे कबाड़ जमा करके रखने से भी धन का नुकसान होता है.

30.1.16

शिवजी की कृपा से सभी इच्छाएं पूरी

शास्त्रों के अनुसार शिवजी की कृपा से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और दरिद्रता से भी मुक्ति मिल सकती है। यहां जानिए शिव कृपा पाने के लिए शिवलिंग पर कौन-कौन सी चीजें चढ़ानी चाहिए...
शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 10 चीजें
1. जल, 2. दूध, 3. दही, 4. शहद, 5. घी, 6. शकर, 7. ईत्र, 8. चंदन, 9. केशर, 10. भांग (विजया औषधि)
इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर या एक-एक चीज शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं।
शिवपुराण में बताया गया है कि इन चीजों से शिवलिंग को स्नान कराने पर सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। स्नान करवाते समय ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए।

28.1.16

शनिदेव ने नहीं मानी रावण की बात

शास्त्रों से- जब शनिदेव ने नहीं मानी रावण की बात

शनि बहुत धीरे चलने वाला ग्रह है। इसीलिए शनि एक राशि में करीब ढाई वर्ष रहता है। धीरे-धीरे यानी श्नै: श्नै: चलने के कारण शनि को श्नैश्चर भी कहा जाता है। शनिदेव धीरे क्यों चलते हैं, इस संबंध में शास्त्रों में एक प्रसंग बताया गया है। ये प्रसंग रावण और शनिदेव से जुड़ा है।
प्रसंग के अनुसार जब मेघनाद का जन्म होने वाला था तब रावण चाहता था कि उसका पुत्र अजेय हो, जिसे कोई भी देवी-देवता हरा न सके, वह दीर्घायु हो, उसका पुत्र तेजस्वी, पराक्रमी, कुशल यौद्धा और ज्ञानी हो। रावण प्रकाण्ड पंडित और ज्योतिष का जानकार भी था, इसी वजह से उसने मेघनाद के जन्म के समय सभी नौ ग्रहों और नक्षत्रों को ऐसी स्थिति में बने रहने का आदेश दिया, जिससे उसके पुत्र में वह सभी गुण आ जाए, जो वह चाहता है।
उस समय पूरी सृष्टि में रावण का प्रभाव इतना अधिक था कि सभी ग्रह-नक्षत्र, देवी-देवता उससे डरते थे। इसी वजह से मेघनाद के जन्म के समय सभी ग्रह वैसी ही राशियों में स्थित हो गए, जैसा रावण चाहता था। रावण ये बात जानता था कि शनि देव न्यायाधीश है और आयु के देवता हैं। शनि इतनी आसानी से रावण की बात नहीं मानेंगे। इसीलिए शनि को भी जबरदस्ती रावण ने ऐसी स्थिति में रखा, जिससे मेघनाद की आयु वृद्धि हो सके।
आगे की स्लाइड में जानिए शेष प्रसंग...
तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
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मेघनाद के जन्म के समय शनि ने तिरछी कर ली थीं नजरें
शनि ने मेघनाद के जन्म के समय अपनी नजरें तिरछी कर ली थीं। तिरछी नजरों के कारण ही मेघनाद अल्पायु हो गया। जब रावण को ये बात मालूम हुई तो वह शनि पर अत्यंत क्रोधित हो गया। क्रोध में रावण ने शनिदेव के पैरों पर गदा से प्रहार कर दिया। इसी प्रहार की वजह से शनिदेव लंगड़े हो गए।
शनि की तिरछी नजरों के कारण ही मेघनाद की मृत्यु अल्पायु में लक्ष्मण के हाथों हो गई। मेघनाद तेजस्वी और पराक्रमी था, उसमें वे सभी गुण थे, जो रावण अपने पुत्र में चाहता था। सिर्फ शनि की स्थिति बदलने से उसकी आयु कम हो गई।
लंबी उम्र के लिए करना चाहिए शनि की पूजा
ज्योतिष के अनुसार शनिदेव आयु के कारक देवता है। इसीलिए लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना पूरी करने के लिए शनि की विशेष हर शनिवार को करनी चाहिए।

15.1.16

शनिवार को करें ये उपाय, दिनोंदिन बढ़ता रहेगा आपका पैसा

शनिवार को करें ये उपाय, दिनोंदिन बढ़ता रहेगा आपका पैसा

आज के समय में पैसों का होना बहुत जरुरी है, क्योंकि इसके बिना जीवन में किसी भी सुख का मिलना बड़ा ही कठिन होता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार यदि शनिवार को नीचे लिखा उपाय किया जाए तो संपत्ति दिनोंदिन बढ़ती रहती है। ये उपाय इस प्रकार है-
उपाय
शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद किसी पीपल के पेड़ से एक पत्ता तोड़ लाएं। उस पर सफेद चंदन से गायत्री मंत्र लिखें और उसका पूजन करें। अब इस पत्ते को अपने कैश बॉक्स, गल्ला, तिजोरी या जहां आप पैसा रखते हैं, वहां इस प्रकार रखें कि यह किसी को दिखाई न दे। इस पीपल के पत्ते को हर शनिवार को बदलते रहें। इससे घर में सुख-शांति रहेगी और धन-संपत्ति भी बढ़ती रहेगी।

नींबू, काली मिर्च और सरसों के इस उपाय से चल पड़ेगा आपका बिजनेस

नींबू, काली मिर्च और सरसों के इस उपाय से चल पड़ेगा आपका बिजनेस

क्या आपका व्यवसाय अचानक ठप्प पड़ गया है या उस पर किसी की बुरी नजर लग गई है? बिजनेस का चलते-चलते अचानक ठप्प हो जाना कई बातों की ओर इशारा करता है। हो सकता है किसी ने आपकी दुकान पर टोटका किया हो या किसी की बुरी नजर आपकी दुकान पर लग गई हो। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखा टोटका करें। व्यवसाय फिर से ठीक चलने लगेगा।
टोटका
रविवार के दिन दोपहर के समय पांच कागजी नींबू काटकर व्यवसाय स्थल पर रखकर उसके साथ एक मुट्ठी काली मिर्च, एक मुट्टी पीली सरसों रख दें। अगले दिन जब दुकान या व्यवसाय स्थल खोलें तो सभी सामान कहीं दूर जाकर सुनसान स्थान पर दबा दें। इस प्रयोग से व्यवसाय चलने लगेगा या अगर किसी की बुरी नजर लगी होगी अथवा टोटका किया होगा तो उसका प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा।